भगवान का अस्तित्व

श्री कृष्ण ने गीता में कहा :
मुझ  निराकार परमात्मा से सारा  जगत
जल से बर्फ के समान परिपूर्ण है
सब मनुष्य मेरे अंतर्गत  
संकल्प शक्ति से हैं
पर वास्तव में मैं उनमे स्थित नहीं
किन्तु ये मेरी ईश्वरीय शक्ति है कि
प्राणियों को उत्त्पन्न करने वाला
भरणपोषण करने वाला होने पर भी
मेरी आत्मा प्राणियों में स्थित नहीं है
जैसे आकाश से उत्पन्न वायु
आकाश में ही है
वैसे ही मेरे संकल्प से उत्पन्न
सभी प्राणी मुझ में ही है

बेशकीमती

   किसी के पास कुछ भी हो 
   वो हमारे काम का नहीं
   हमारे पास जो है वो ही  
दुनिया में सबसे ज़्यादा कीमती 
     हम बेहतर की तलाश 
  में बेहतरीन को क्यों खोएं 
उसी को संवारे और निखारे हम  
   जो हमारा वो ही बेशकीमती

लम्हा

एक लम्हा प्यार का 
है एक लम्हे की ज़िन्दगी   
सहेज कर इसे दिल में रख 
ये लम्हा है बंदगी 

इस लम्हे में मैं ना थी 
और कहीं तू भी नहीं 
कोई नहीं सिर्फ हम थे ये  
इस लम्हे की पाकीज़गी
एक लम्हा प्यार का 
है एक लम्हे की ज़िन्दगी   
   
ये लम्हा सदियों पे भारी 
अभी तलक ये बेकरारी  
ये लम्हा ही ज़िन्दगी है 
जान ले ले ना हमारी 
ये  लम्हा जाएगा साथ 
ना होगी कभी अलहदगी 
एक लम्हा प्यार का 
है एक लम्हे की ज़िन्दगी   
 

जवाकुसुम

क्यों नहीं बता देते राज़ तुम 
हर वक़्त रहते हो क्यों गुमसुम 
अंदेशा हमे है तेरी कश्मकश का यार,
दूर कर सकते हैं सारे रंजोगम  
गुलाब ना सही !हम हैं "जवाकुसुम" 

ज़िन्दगी

ए ज़िन्दगी !  तेरे जाल में 
जो उलझा नहीं वो पार है
तुझसे प्यार है मुझे बहुत 
पर उलझने से इंकार है 
सब पर तू मुस्कुराती ज़रूर है   
पर बुरी ही क्यों लगती है तू
जो ज़िंदादिली से ना जिया 
तो ज़िन्दगी बेकार है 
तू गुलाब की तरह खिली खिली 
काँटों से मगर घिरी हुई 
आ हाथ बढ़ा के लपक लूँ मैं 
कांटे चुभें स्वीकार है 
तू जिसमे वो जीवंत सा 
उत्साह से भरा हुआ 
बाधाएं उससे डर रही 
जीत उसीका अधिकार है 
कहती है आँखों की चमक 
मुस्कान भी कुछ कह रही 
अपने पे गुरुर का है सुरूर 
तू मुझमे बरकरार है 

कभी कभी

कभी कभी लगता है यूँ 
सब कह दिया 
सब लिख दिया 
तभी दिलोदिमाग के 
कोने में जलता है दिया 
ये तो अभी कहा नहीं 
ये तो अभी लिखा नहीं 
दिमाग की कश्मकश 
दिल की जद्दोजहद 
समाज से नाराजगी 
अपने पराये से निभाव 
बहुत ख़ुशी थोड़ी गम की बात 
अभी तो कुछ भी कहा नहीं 
अभी तो कुछ भी लिखा नहीं 
अनुभव अभी लिखे कहाँ 
बन प्रेरणा मैं खड़ी हुई कहाँ 
जो जाना वो बांटा कहाँ 
कितना कहा पर कम रहा  
अभी ख़त्म नहीं बात ज़ज़्बात  
दिल में रह जाती है बात 

आँसू





ये आँसू बोलते हैं 
राज़ कुछ खोलते हैं
कभी आँखों में रहते
मगर बहते नहीं हैं   
ये दिल दुखा बहुत है 
पर जताते नहीं है 
ये आँसू  बोलते हैं 
कभी ये बहते ही जाते 
और लब मुस्कुराते
दिल खुश बहुत है 
ये बताते नहीं हैं 
ये आँसू बोलते हैं
कभी ये बहते ही जाएँ 
ना लब मुस्कुराएं 
हों आँखें लबालब 
पर वीरानी ना जाए
दिल बहुत दर्द में है 
और छुपाते भी नहीं हैं
ये आँसू बोलते हैं
पर कभी ऐसा भी होता 
ये दिखते भी नही है 
आँखे सूखी हैं रहती
लब खामोश रहते 
दिल जार जार रोता
ये आँसू खून के हैं
हम सब जानते हैं    
ये आँसू बोलते हैं
राज कुछ खोलते हैं