होश

हमने तो बस जाना ये के, होश छीने है हर कोई  
जब हो वक़्त कम मायने नहीं रखता है तब कोई 
अपने वज़ूद को  इज़्ज़त देना, है पहला फ़र्ज़ इंसा का  
सदा तुम होश में रहना,लबों की हॅंसी ना छीन ले कोई  

तू ही तू

तुझसे ज़ुदा मुझे मेरी 
हस्ती नहीं चाहिए 
ए खुदा!मेरे भीतर बाहर 
बस तू ही तू चाहिए 
दिया है जो भी तूने 
इस मांग के आगे 
है कुछ भी नहीं 
ये देने को होजा राज़ी
तो फिर क्या चाहिए 
रब मेरे ! मेरी छोटी सी 
ये इल्तिज़ा तो सुन 
चारों तरफ तेरी हस्ती 
की भीनी खुशबू चाहिए 
सांस में, लहू में, धड़कनों में 
हो बस तू ही तू 
हर तरह से रोशन मेरी 
सुर्ख रूह चाहिए 
हँसूँ रोऊँ बोलूँ नाचूँ
करूँ कुछ भी मैं 
तुझे पसंद आये 'रब '
तेरी इसमें रज़ा चाहिए 

अडिग

चाहे कोई तेरे दर्द का मरहम बने ना बने 
जीवन बगिया में नया फूल खिले ना खिले 
फैले रहें चारों ओर शांति के खूबसूरत फूल 
कोशिश कर तेरी दुनिया रहे अडिग ! कभी न हिले 
 

झूठ

इतने झूठ बोल कर भी जिन्हे बुरा नहीं लगता 
खुदा बचाये मुझे ऐसे बड़े महान लोगों से 
सच बोलते हैं हम, हमारी छोटी सी है दुनिया 
दहल जाए ना ये दुनिया इनके कारनामों से 

सिर माथे

ज़िन्दगी तूने दिया जो,हमने लगाया सिर माथे   
जो लड़ते हैं तुझसे वो भी तो  कुछ नहीं पाते 
सच है मौत को गले लगाने वाले होते हैं कायर   
जीतते हैं वही  जो कमियों के साथ गले लगाते 
संघर्ष से घबराना टूटना बिखरना मेरी नहीं फितरत 
गिरके उठे हैं बार बार तेरी आँख से आँख मिलाते  
मोहब्बत है बहुत और दिल में तेरी इज़्ज़त भी 
तेरा करम है रब कि हम रोज़ निखर निखर जाते 
आदमी फंसाया करता था जाल में मछलियां 
अब तो आदमी ही आदमी को जाल में हैं फंसाते 
ज़िन्दगी अब तेरा तो हर अंदाज़ है निराला 
कोशिश है संवार लूँ बिगड़ा,जी लूँ जी भर हँसते मुस्कुराते  

इम्तिहान

इम्तिहान सबकी ज़िन्दगी में हैं तेरी भी और मेरी भी 
ये फैसला कैसे हुआ किसका बड़ा था इम्तिहान 
झुके हम निभाया हमने सबकी खातिर दी कुर्बानी 
तुमने पाया,काबिल थे तुम,क्यों हुआ ये तुम्हे गुमान

महानता

 पुरानी महानता की बात करना, बात है अच्छी 
 मगर आज के हालात का भी जायजा लो ना
 इंसानियत का स्तर रोज़ गिर रहा नीचे 
 महंगाई का पैमाना भी कभी नाप लो ना 
आत्म मुग्ध आप इतने हो गए हो क्यों 
अपने गिरेबान में भी कभी झाँक लो ना 
 

तूफान

तूफान की आमद अंदर या बाहर 
सब कुछ देती  है बदल 
बदल जाता है नजरिया
बदल जाती है अकल
कोई तूफान आता ज़िन्दगी में 
हो जाए सबकुछ उथलपुथल 
दिल डूबे कशमकश में 
कैसे जाऊं मैं इससे निकल 
सबतरह से समेट खुद को 
ताकत लगाते हैं सकल  
अंदर बाहर भड़के तूफान 
साँसें भी हो जाती विकल
आखिर थमेगा ही तूफ़ान 
बच जाती है सबकी जान 
पर ये हो जाता है क्या !
वही रहते नहीं हम,जाते हैं पूरे बदल 
समझ नहीं पाते कि कैसे जीते 
कैसे पिया ये गरल 
फिर भय नहीं रहता कोई 
छिनने का नहीं रहता डर                
सहज मुस्कान नैन सजल 
दिल में जले हिम्मत की अनल 
वही रहते नहीं हम,जाते हैं पूरे बदल 

कदम

 आप कदम पीछे हटा रहे हैं ? 
 ये भूल का है अहसास या सुनहरे 
 ख्वाब बिखरते नज़र आ रहे हैं 
 नज़र आ रही है हार या है पश्चाताप   
 प्यार से नरम तेवर दिखा रहे हैं !....... 

वक़्त

पता चले ना चले , वक़्त गुजर जाता है 
शाम जब आती है , सूरज भी ढल जाता है 
 
ज़िन्दगी  की शाम से इतना ना घबरा 
वक़्त की क़द्र कर ,दिन ज़रूर आता है 

कोई समझे या ना समझे तुझे दोस्त 
गौर कर खुद को तू कितना ,समझ पाता है     

कोई अंधा सिर्फ आँखों से नहीं होता 
दिलोदिमाग का पर्दा बड़ा सताता है

लब मुस्काते  हैं उसके और आँखे सूनी  
होता है यूँ दर्द जब हद से गुजर जाता है  

क्यों समझते हैं हमे लोग कमज़ोर 
हमारे साथ भी, भीतर भी, विधाता है 

आप होंगे बहुत मशहूर ,अमीर ,काबिल माना  
हम खड़े हैं सामने तो कुछ तो हमे आता है