तू ज़िद्द कर दुनिया बदलने की,

तू ज़िद्द कर दुनिया बदलने की,
बदलाव कुछ तो आएगा
न बात कर तू कमियों की
दिल का सुकून न पायेगा
नहीं मिलता कुछ दुनिया को हराने से,
लड़ तू अपनी कमियों से , तभी निखर पायेगा
तेरा मुक़ाबला नहीं है दुनिया से
तेरा मुक़ाबला खुद से ही है
तू कब ये जान पायेगा

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