मेरे पास तुम न आओ

मेरे  पास  तुम  न  आओ 
 न  नज़र  से  नज़र   मिलाओ 
 मेरे  ख्वाब   अब  हैं   सिर्फ  मेरे 
 मेरा  वक़्त  अब  है  सिर्फ  मेरा 
 
निखरुं  कैसे  मैं  दिन-बदिन 
 यही  सोचे  सिर्फ  ज़हन  मेरा 
 तुम  खुश  रहो  जहाँ  रहो 
 मेरी  खुशियों  पे  है  अब  हक़  मेरा 

 जो  पीठ  करो  मेरी  तरफ 
 तुम्हे  भूल  जाऊँ  मैं  उस  घड़ी 
 मेरी  यादों  से  भी  मिटाऊँगी  तुम्हे 
 मेरी  यादों  पे  नहीं  हक़  तेरा 

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