बुरा तो लगता है

जब आप कुछ बोलो ,
 बच्चे टोक देते हैं। 
 "ऐसा नहीं कहते ,"
 वो रोक देते हैं। 
 "ये ठीक नहीं, "
 "यह सही रीत नहीं ,"
 "ये तो नहीं हो पायेगा।" 
 वो बोल देते हैं 
              तो बुरा तो लगता है। 
 "गलतियां तो आपने भी की हैं जीवन में ,"
 "हम नहीं जी पाएंगे इस तरह।"
 "अलग शख्सियत हैं हम ,"
"अब अलग है ज़माने की हवा।"
 जानती हूँ सच वो बोल देते है ,
                 पर बुरा तो लगता है 
 अहसास है की हमसे कहीं ज्यादा ,
 समझ उन्हें  है जीवन की
 सच सुनने और सच कह पाने की हिम्मत भी ,
 पर अनजाना डर भी लगता है ,
 वो ये डर नहीं समझते ,
                     बुरा तो लगता है।   

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