रहने दे मुझे भी खुश मगर।।





मैं क्या कहूं ,है किसे फिकर
 न अब रही मेरी कदर। 
 मेरी साँसों पे न जाईये ,
 ये जिंदगी हुई दरबदर।।
 सोचा था स्वाभिमान से ,
 इस जहाँ में रहूं मैं शान से। 
 कैसे बचाऊं उसे मैं अब ,
 कुचला गया है जो उम्र भर।।
 न चाहिए तेरा प्यार  अब, 
 न चाहिए तेरी नजर। 
 तू जहाँ रहे सदा खुश रहे ,
 रहने दे मुझे भी खुश मगर।।     

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