खुद से बेहतर

हम तो पहले ही से आपको ,
 खुद से बेहतर समझते हैं।
 बड़प्पन कम न करो अपना,
 हमें कमतर बताने में।।
 दीवाना है दिल मेरा,
 अपना समझता है आपको 
 अपनापन यूँ कम न करो,
  हमारी कमियां गिनाने में।।
 गुजर जाएगा बुरा वक़्त भी, 
 खुश रहो न तुम ।  
 तुम्हारा उतरा हुआ चेहरा,
 लगा है दिन गिनाने में।।
 आसान है शब्दों से,
 किसी को चोट पहुंचना। 
 गहरी चोट है कितनी,
 समय लगेगा समझ पाने में।।
 अवधारणा बनाना दुश्मनी निभाना, 
 हमारा काम हो नहीं सकत। 
 तुम ही भूल बैठे सब ,
 अहम् को सजाने में।। 

Leave a Reply