अहम्

लड़ना है अपनी
  कमियों से 
 अब तो बस
  जीतना है मुझे 
 जानती हूँ अर्थहीन
  है कुछ भी पाना 
 तो पाने की जिद
  क्यों है मुझे 
 ये अकेलापन 
 वरदान है प्रभु का
 ये रोज आइना
  दिखाए मुझे 
 शायद माफ़ ना कर पाना
 है बहुत बड़ी कमी
 ये ही तनहाई
  देती है मुझे 
 अहम् को भुलाकर
  भूल पाऊं सब कुछ 
 तो ही शान्ति
  मिलेगी मुझे
 व्यव्हार में उतर पाए
  ज्ञान अगर
 मिल जाएगा सबका
  प्यार फिर मुझे
 मैं अपने लिए
  इतनी महत्वपूर्ण क्यों हूँ 
 जब किसी की चाहत
  मिली ना मुझे 
 आ सिर्फ प्यार से
  चले दो कदम 
 भूल कर 
 हम सब 
  अपना अपना अहम्
 ना रहे तेरा तुझे
  ना रहे मेरा मुझे    

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