दर्देदिल

दर्देदिल कुछ इस तरह उभर आया 
 आसुओं का सैलाब उमड़ आया
       चाहा था जिंदगी में क्या मैंने
 देखिये आज मैंने क्या पाया
 दिल का मिट जाता हर मलाल कैसे 
 ऐसा निश्छल सा प्यार न पाया
 दर्देदिल कुछ इस तरह 
        तेरे संग एक उम्र गुजार दी हमने 
 ना पाया प्यार ना विश्वास पाया
 देखा है आइना भी जब हमने
  खुद को खुद से ही जुदा पाया
 दर्देदिल कुछ इस तरह 
          घाव अपने ही दिया करते हैं
 ये बावरा दिल नहीं समझ पाया 
 अपने दिल को जो टटोला हमने
 उसको यूँ ही बावफ़ा पाया 
       दर्देदिल कुछ इस तरह 

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