चाहत

मुनासिब नहीं किसी को टूट  कर चाहना 
 बिखर जाओगे तुम उम्मीद की तरह 
 जरुरत खत्म तो ख़त्म मोहब्बत भी 
 दुनिया मासूम नहीं तेरे मेरे दिल की तरह 

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