औरत

औरत तू सर्वश्रेष्ठ रचना
 व  रचनाकार है 
तू गुरु तू माँ तू पिता भी है
तू घर के अंदर 
और बाहर भी है
 तेरे पास प्यार
 और सत्कार भी है
तुझे सभी का ख्याल भी है 
अत्याचारियों के लिए
 हुंकार भी है
सभी गुणों से
 तू युक्त है
दिखती है परतंत्र
 पर तू मुक्त है 
तेरी सहन शक्ति
 सराहनीय है
तू एक अहसास
 एक अनुभूति है
तेरे बिना संभव नहीं
 सृष्टि है 
दुःख तुझे डराते हैं
 पर तू डरती नहीं है
अपने संसार के लिए
 पीछे हटती नहीं है 
तेरी पहचान तू खुद है 
पति या बच्चा नहीं है
समाज में किसी भी रूप में 
तेरा योगदान सराहनीय है 
समाज में दोयम दर्जे से 
तेरी आत्मा घायल है
जबकि तेरे गुणों का 
हर कोई कायल है
तुझे औरत होने का मलाल है 
ये पुरुषों पर बहुत बड़ा सवाल है
त्याग के नाम पर 
तू भ्रमित न हो
अपने ही अस्तित्व पे
 शंकित न हो 
वो कर जो करना चाहती है
 लड़ गर लड़ना चाहती है
 तेरा विश्वास ही
 तेरे जीवन की थाती है
निर्माण तेरा शस्त्र है विध्वंश नहीं
तू तो सृष्टि का आरम्भ है अंत नहीं 

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