समय

समय रुकता नहीं कभी 
ये यूँ ही चलता रहता है 
सदुपयोग हो समय का तो
 आसान हो जीवन
नहीं तो यूँ ही ये तो
हाथों से निकलता रहता है
 समय से बंधी प्रकृति
सूरज चाँद और तारे 
समय से रात दिन और ऋतुएँ 
बदलती रहती हैं 
समय अनुकूल हो तो 
खुश रहता है हर कोई 
गर प्रतिकूल हो जाए तो 
निराशा उदासी बेचैनी
चाहे अनुकूल हो या प्रतिकूल 
सम रहना सीख ले बन्दे 
बस चलता रह तू भी 
जैसे ये चलता रहता है 
समय रुकता नहीं कभी 
 ये यूँ ही चलता रहता है 

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