स्त्री

इंसान है वो प्यार और
 ज़ज्बात से भरी हुई
सिर्फ जिस्म समझ के नासमझ 
न यूँ उसका
 तू अपमान कर 
प्यार और  विश्वास से
 वो महकती खूब है 
बेरुखी बेकद्री से 
ना उसको तू परेशान कर

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