निरपेक्ष

पत्थर भी फूल हो जाएँ  
चोट चोट न रहे
 ज़हर बन जाए अमृत 
बस आनंद ही आनंद बना रहे 
 ये स्थिति पा सकेगा  
सिर्फ एक  तरह से दोस्त 
अपेक्षाओं को छोड़ कर 
निरपेक्ष तू बना रहे 

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