इसीलिए





रोम रोम में रम गया 
इसी लिए वो राम है
संसार को आकर्षित करता 
इसीलिए वो कृष्ण है 
है परम मंगलकारी कल्याणकारी 
इसीलिए वो शिव है 
हम सभी आत्माएं उसी का है अंश 
इसीलिए वो परमात्मा है
पांचों तत्वों को अपने में समाहित करता 
इसीलिए वो भगवान है 
उसके बिना कुछ होता कब है 
इसीलिए वो रब है
 जीवन के हर क्राइसिस को मिटा दे
इसीलिए वो क्राइस्ट है 
ज्ञान बुद्धि और योग में सिद्ध है 
इसीलिए वो बुद्ध है
हर तरह के डर से है मुक्त 
इसीलिए वो महावीर है  
प्यार से पालन पोषण करता 
बिन शर्त प्यार  परवाह है करता
इसीलिए वो माँ है 
जीवन की नाँव का है मल्लाह
इसीलिए वो अल्लाह है 
दुनिया के हुनर  को है माँजता
इसीलिए वो है अहुरमाज़ता   
कण कण में है वो जिसकी भक्ति है 
इसीलिए वो प्रकृति है
सहज सरल शांत पर प्रकाण्ड है 
इसीलिए वो ब्रह्माण्ड है  
पूर्ण सृष्टि का वो गुरु है 
इसीलिए हम सब सिख हैं     
कृपया बताइये इसमें संशय कहाँ है 
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म यहाँ है
मत भटक ढूंढने को उसे जग में 
वो वहीँ है, तू जहाँ है

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