कमज़ोर नहीं हूँ मैं

ना कमज़ोर नहीं हूँ मैं 
दर्द से टूटी नहीं 
खुद से भी रूठी नहीं
नहीं मैं झूठी  नहीं
तन्हाइयों को झेल कर    
मज़बूत दीवार सी खड़ी हूँ मैं 
ना कमज़ोर नहीं हूँ मैं
प्यार खूब खूब मिला 
वार मज़बूत मिला 
अश्कों की बाढ़ थी 
डगमग सी नांव थी  
सह कर हर वार 
अडिग ही खड़ी हूँ मैं 
ना कमज़ोर नहीं हूँ मैं
भीड़ में अकेली सी
हाँ मैं पहेली सी  
कभी भड़की
 कभी सहमी सी 
तन्हाई जिसे न तोड़ सकी 
वो मज़बूत वृक्ष  हूँ मैं 
ना कमज़ोर नहीं हूँ मैं
आशा नहीं 
निराशा नहीं
जो कभी प्रकाशित थी नहीं  
मार्तण्ड के प्रकाश से
चमकने लगी हूँ मैं 
ना कमज़ोर नहीं हूँ मैं 

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