मुस्कान

वो कैसे मुस्काएं  जिन पर लागू सौ सौ पहरे हैं 
न वो हैं मुस्काएं  ज़ख्म भी जिनके गहरे हैं
मुस्काने हैं कई तरह की दुनिया के बाजार में    
गहरी है मुस्कान उन्हीं की जिनके दर्द भी गहरे हैं

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