पंचतत्व

ज़मीन से रह ज़ुडा 
आकाश को कर नमन 
आगे बढ़ने की आग ज़िंदा रख 
ज्ञान जल से कर दुःख शमन
 प्यार की बयार से 
भर सभी का दामन
 साध ये पंचतत्व तू 
संसार करेगा खुद नमन 

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