ये महामारी!

ये महामारी!
प्रकृति की देन?
या इंसानी साज़िश?
इंसानी कमज़ोरियों का भी 
उल्लेख होना चाहिए
कितने पूंजीपति व्यापारी और राजनीतिज्ञ शामिल है इसमें  
पता होना चाहिए 
इंसानी वेश में कितने लालची दम्भी भेड़िये शामिल है 
हमे पता होना चाहिए 
इंसान ने छोड़ी इंसानियत 
उसकी भी बात होनी चाहिए 
ऑक्सीजन ,दवाई और प्रशासन व्यवस्था 
की भी बात होनी चाहिए 
अपने हालात के लिए अपनी ज़िम्मेदारी भी 
 तय होनी चाहिए
दिखाया बताया समझाया जा रहा है जो हमे 
उसकी भी पूरी तफ्तीश होनी चाहिए
जो हमने चुने सरपरस्त 
उनकी कुछ तो जवाबदारी होनी चाहिए 
जो मगरूर है अपनी हस्ती और मस्ती में 
उन्हें आइना ज़रूर दिखाना चाहिए 
हम उलझे रहे गैर ज़रूरी बातों में
हमे अपनी परवाह होनी चाहिए
कभी धार्मिक आस्था,, कभी खेलकूद , कभी चुनाव 
पैर खुद कुल्हाड़ी पे नहीं मारना चाहिए 
मौत ही मंज़िल है गर 
तो अब ये डर निकलना चाहिए 
सर पे कफ़न बंधा है गर तो 
गोली सीने पे खानी चाहिए    

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