हर तरफ खतरा

गज़ब हाल है यारों !हर तरफ खतरा !
इंसान को इंसान से
इंसान के ईमान से  
परिवार को मुखिया से 
बाग़ को माली से
नागरिक को प्रशासन से 
मरीज़ को डॉक्टर से
लोगों को सरकार से 
हर मंदिर हर दरबार से 
हर मस्जिद और मज़ार से 
भावनाओं के ज्वार से 
घर के बाहर रहने से 
घर में भी रहने से
दिल की हर ख़ामोशी से  
दिल के हर शोर से     
 इसे छेड़ मत यार 
रोयेगा ज़ोर से 
कहा ना! हर तरफ खतरा है !

कर देंगे ?

मौत के डर से जीना नहीं छोड़ देंगे
बहकने के डर से पीना नहीं छोड़ देंगे
हम वो अड़ियल है साहब ,कोरोना के डर से 
कुम्भ नहाना नहीं छोड़ देंगे 
कोई एक गलत करे ,हम करेंगे सौ!
 हम क्या कम बेवक़ूफ़ है !जो उसे जीतने देंगे  
 यार हमारी नाकामी मत गिनवाओ हमें
हम तुम्हारी नाकामियों पे पूरी किताब लिख देंगे 
परिवार नियोजन से तो अच्छा ही कर रहे हैं हम  
एक सौ तीस करोड़ से कुछ करोड़ तो कम कर ही देंगे 
हम से सीखो सफाई के नंबर होते है पूरे 
सब योजनाओं को तो हम अपने नाम लिख ही देंगे 
अरे छोड़ो !जनता को कुछ समझ ही कहाँ है ?
उन्हें जात धर्म हिन्दू मुस्लिम आरक्षण में उलझा के रख देंगे 
मत चीखो चिल्लाओ जुल्म हुआ!जुल्म हुआ! हमारे राज में तुम पर 
तुम्हें क्या लगता है ??हम 'तुम्हें' छोड़ देंगे !!
क्या खाकर कोई हराएगा हमें ?एक छिछली छिछोरी सी बात 
और हम हवा का रुख मोड़ देंगे 
जनता का क्या!! भूल जायेगी पुराना गम  
जब हम नया जख्म रोज़ देंगे 
लालच इंसान की है सबसे बड़ी कमज़ोरी 
इसके लिए देश में हम कुछ भी घटा जोड़ देंगे 
शहीद ,किसान ,आम नागरिक, मरता तो पहले भी था 
तो क्या हुआ उनमे हज़ार लाख नाम जोड़ देंगे 
तुम क्या समझो क्या क्या करके पहुंचे यहाँ तक हम 
अब क्या अपनी पुरानी रवायत छोड़ देंगे       

स्थिर आत्मा

"उसे वेदों से क्या लेना
जो 'ब्रह्म' 'को 'तत्व 'से जाने 
रहे सुख दुःख में सम हरदम
राग भय क्रोध ना जाने 
 वो है स्थिर आत्मा जो निर्लिप्त
 भाव से करे हर कर्म 
 अंतर्मन की प्रसन्नता
 पा ली हो जिसने " 

आत्मा

"अविनाशी है जीवात्मा 
जो दिख रहा है वो नाशवान है 
हमारी आत्मा अजन्मा नित्य 
 सनातन और पुरातन है"
जो जाने ये रहस्य वो!
 ना मरता और ना मारता है !!
आत्मा सर्वव्यापी  अचल
 अव्यक्त   अचिन्त्य और निर्विकार 
जो ज्ञानी जानता है वो 
कभी भी शोक नहीं करता  है

कुछ लोग

कुछ लोगों का
 असमंजस में पूछना 
'क्यों मुरझा गया हमारा रिश्ता '
'क्यों दूर हो गया मेरा अपना'
मेरी समझ में 
पौधे और रिश्ते को 
एक ही तरह संभालना  
जैसे पौधे को चाहिए 
पानी सूर्य की रौशनी  
खाद और हवा 
और उनका सही अनुपात
वैसे ही रिश्ते को चाहिए 
प्यार ख्याल विश्वास
 और ज़ज़्बात
 मगर हमने 
कभी की कोई 'कमी' 
कभी भूले 'अनुपात'
सही मात्रा में हो
 प्यार विश्वास ख्याल 
और ज़ज़्बात का मिश्रण
तो भूल नहीं पाओगे 
साथ बिताये वो अमूल्य क्षण 

तेरे लिए

अगर  इश्क़ की गलियां नहीं ,तेरे लिए
फूलों की कलियाँ नहीं ,तेरे लिए 
मशविरे ही मशविरे हैं, जहाँ जाओ 
चारोँ तरफ गम के अँधेरे हैं, सिर्फ तेरे लिए 

कभी पैसे, कभी प्यार ,कभी अपनेपन ,को तरसे 
कोई राहत की नहीं सांस यहाँ ,तेरे लिए
जिम्मेदारी निभाईं ,सहा जिनकी खातिर 
वो ही बनायें बात ,न बनें सहारा तेरे लिए 

क्या तुझे अपनी अना का भी पास नहीं 
कुछ नहीं जमाने के पास तेरे लिए
भूल बैठा है तू ज़िन्दगी का सबक
वक़्त नहीं पास किसीके, आज तेरे लिए 

बन गया है' सिफर 'गर तू अपने लिए 
साथ खड़ा रह सभी के साथ ,लाज़िम है तेरे लिए 
तेरी हर बात ,हर ज़ज़्बात ,हर अहसास,' सिफर' 
क्यों ज़रूरी है हर एक बात फिर तेरे लिए 

सिर्फ ज़रूरी है तेरा साथ सिर्फ तेरे लिए 
सिर्फ ज़रूरी है तेरा साथ सिर्फ तेरे लिए

हम में

ढूंढ रहे है कईं लोग 
उम्मीद ओ आस हम  में 
जिंदगी से लड़ने के
ज़ज़्बात हम में
मर गए थे हम तो
 बहुत पहले ही    
ग़लतफ़हमी है उन्हें 
जिंदगी ले रही है
 सांस हम मेँ
चाहो भी तो ज़िंदा करने की
 तुम्हारी औकात नहीं  
कोई क्या जाने है कितना
 मज़ा दर्द ओ गम में 
उम्र का बड़ा हिस्सा जो 
तय किया तनहा हमने
तन्हाईयाँ रच  बस गयी 
बहुत गहरे हम में
तुमसे गुज़ारिश है मेरी 
मुझपे अहसान करो 
अपना लो उसको जो
 दिखता है तुम्हारा हम में