मुक्त

"तू जो खाता है ,जो कर्म करता है
जो हवन करता है ,जो दान देता है,
और जो तप यज्ञ करता है
वह सब  प्रभु के अर्पण कर "
इससे तू कर्मबन्धन से मुक्त
संन्यास योग से युक्त
और हो जाएगा हमेशा के लिए
संसार बंधन से मुक्त :)

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