ज़मीर

ज़मीर उसका जागेगा जिसका ज़िंदा है 
क्यों दुनिया में इंसानियत से बड़ा धंधा है?  
बीमारों, लाशों, पर मत कर मुनाफाखोरी 
आज इंसान इंसान से ही शर्मिंदा है 

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