कमाल

बहुत उलझे उलझे ख्याल हैं 
मेरे खुद से ही कुछ सवाल हैं 
ना सुलझता है कुछ,ना जवाब आता है 
 बन गए जान का बवाल हैं

 वो जो लगते थे बेमिसाल हैं 
हमारी कौम के लिए कमाल हैं 
आज छुपे बैठे हैं सौ पर्दों में 
लोग  साँसों के लिए मुहाल हैं
 
उनकी बातें इतनी दिलकश 
उनका अंदाज़ लाज़वाब 
क्यों चुना उन्हें नाखुदा अपना  
मिला धोखा ,यही मलाल हैं 

सब अपनी अपनी सोच लिए बैठे हैं 
सामने सामने लोग जा रहे हैं 
कर तो रहें हैं इतना कुछ ,देखो तो!
साक्षात सांत्वना की मिसाल हैं
  
संवेदनहीनता समाज में पसरी है 
पता है बिमारी यहाँ वहां बिखरी है
स्वार्थ से ऊपर उठकर नहीं सोचता कोई 
साथ कुछ नहीं जाएगा ये जानते हैं 
 पर कमाल हैं !सभी कमाल हैं !

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