परमात्मप्राप्ति

जो प्राणी सर्वज्ञ, नियंता, अनादि,
सूक्ष्मतर, सबके धारण पोषण करनेवाले,
सूर्य के सामान प्रकाशरूप,अविद्या से परे,
शुद्ध सच्चिदानंदधन परमात्मा
का ध्यान करता है
वो अंत काल में योगबल से
भौहों के मध्य में प्राण को
अच्छे से स्थापित करके
निश्छल मन से याद करते हुए
उस दिव्य परमात्मा को प्राप्त होता है

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