दुराचारी

यदि कोई अतिशय दुराचारी भी 
दुराचार छोड़ अनन्य भाव से 
भगवान को भजता है 
तो वो साधू ही है !
वो समझ चुका है
परमात्मा के समान 
कुछ भी नहीं है ! 
वो शीघ्र ही धर्मात्मा हो
परम शांति को प्राप्त होता है !
भगवतभक्त कभी नष्ट नहीं होता !

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