मेड

हाय कैसी विपदा आयी,
आज मेरी मेड नहीं आयी,
सिंक भरा है बर्तन से, 
देख आँख मेरी भर आयी ।  
झाड़ू पोंछा कौन करेगा, 
डस्टिंग घर की कौन करेगा,   
उसको तो आराम मगर,
हो गई  मेरी पिलाई।    
पौधों में पानी भी देना,
कपड़ों की तह भी करना,  
सब्ज़ी तक तो कटी नहीं,
खाने की बारी आयी। 
कोई नहीं मेरी मदद करे जो, 
दर्देदिल ये दूर करे जो ,
थोड़ा सा कोई काम करा दे, 
इतनी भी शर्म ना आयी।  
आज मुझे अहसास यही है, 
मेरे जीवन की ख़ास वही है ,
सुख दुःख में काम है आती, 
जो ना पति बच्चे करें ना भाई।

6 thoughts on “मेड

      1. Maybe I can’t relate much as we don’t have one in our house, we do all our chores on our own. But yeah it’s a completely personal choice depending on every family’s needs and conditions. I hope your maid arrives soon! 😊
        And yes I am doing well, thanks for asking. Take care and stay positive! ✌

      2. you are right ! this poem was for humour tried first time but everyone took it seriously !!by the way!my maid is very punctual n nice ! hahaha!
        happy to know you are fine !god bless!

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