प्रभु का परमप्रिय





जो सम रहे , "मित्र शत्रु में,मान अपमान में 
सर्दी गर्मी में सुख दुःख में ,निंदा स्तुति में
जो है मनन शील, ममता रहित ,अनासक्त "
वही स्थिर भक्तिवान मनुष्य, है प्रभु का परम प्रिय !

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