थकान

थक गया तन मन   
क्यों एक दूसरे की छीछालेदर 
ये दिन रात करते हैं 
ये कैसे लोग हैं जो 
टीवी पर बहस करते हैं ? 
झूठ का प्रचार 
अप्रांसगिक छींटाकशी 
सत्ताधारी का महिमामंडन  
हर तरफ दुःख, अशांति 
झूठ का है बोलबाला  
कुछ भी बकवास करते हैं
बढ़ती मंहगाई ,टैक्स ,बेरोज़गारी 
लचर प्रशासन, कमज़ोर न्याय व्यवस्था 
सुरसा की तरह मुँह खोल ये नेता 
बस जनता का 
हर तरह से शोषण करते हैं
कहते हैं इंसान ही इंसानियत भूल रहा 
हमारा क्या कसूर 
तो फिर पुलिस न्याय कानून क्या करते हैं 
वादे इरादे क्या हुए इनके?
बस चीख कर 
एक दूसरे पे ज़िम्मेदारी मंडते हैं 
थक गया तन मन

   

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