राह के पत्थर

जानबूझकर आपकी राह के पत्थर बने हैं हम
चाहते हैं तुम्हें ! इतना कैसे फिसलने दें 
जुड़ा हुआ है ये दिल आपसे ज्यूँ ,स्वास शरीर से   
कैसे आपको यूँ ,हाथों की लकीरों से निकलने दें

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