क्यों





बता ए जिंदगी तुझे, समझ कर भी  
मैं समझूं क्यों 
मासूम बच्चा है दिल के अंदर 
निश्छल प्यार का जो है समंदर       
उसे किसी भी कीमत पे 
मैं खोऊं क्यों, मैं रोऊँ क्यों     
अपने हो या पराये 
चाहे दिल क्यों ना दुखाएँ 
खोकर प्यार अपनों का  
मैं  रोऊँ क्यों मैं खोऊं क्यों 
ज़िन्दगी खूबसूरत है 
मैं नए रंग भर लूँगी  
बचे जो खूबसूरत दिन   
गुजारूंगी शान से मैं!
इन्हे ढोऊं क्यों मैं रोऊँ क्यों   
ढलती शाम,गहराती रात 
कभी हैं राहें पथरीली 
रही योद्धा ही हरदम मैं
अब लड़े बिन हार जाऊं क्यों 
बता ए जिंदगी तुझे, समझ कर भी  
मैं समझूं क्यों  
मैं रोऊँ क्यों मैं टूटूँ क्यों 
मैं हारूँ क्यों मैं रूठूँ क्यों 

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