किन्तु परन्तु

किन्तु परन्तु में 
उलझ गए हम
और हिस्से में आ गए 
ढ़ेर सारे गम

 ना तू मुझसे कम 
ना मैं तुझसे कम
ना देखी होती कमियाँ 
ना बिछड़ते तुम हम

 काश का राग गर 
गाया  न होता 
दिल से एक दूजे को 
अपनाया होता 

 रिश्तों में यारों ना 
बर्फ जाती जम 
झूम झूम गाते 
तराने हरदम

किन्तु परन्तु में 
उलझ गए हम
 

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