ॐ तत सत

ॐ तत सत-ऐसे तीन प्रकार का
सच्चिदानन्दधन ब्रह्म का नाम है    
जिससे सृष्टि के आदिकाल में
ब्राह्मण, वेद,और यज्ञादि रचे गए
इसलिए
"वेद मन्त्रों का उच्चारण करने वाले
श्रेष्ठ मनुष्यों द्वारा शास्त्रविधि से तय
यज्ञ, दान और तपरूपी कार्य
सदा ॐ  नाम का उच्चारण
करके ही आरम्भ होते हैं"
"तत नाम से कहे जाने वाले
परमात्मा का ही यह सब है  
इस भाव से फल को ना चाहकर
विभिन्न यज्ञ ,तपरूपी क्रियाएं
और दानरूपी क्रियाएं कल्याण
की इच्छावाले मनुष्य करते हैं "
सत नाम से कहे जाने वाले  
परमात्मा का नाम सत्य भाव में
और श्रेष्ठ भाव में प्रयोग होता है  

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