संवेदनहीन

भावनाशून्य संवेदनहीन मनुष्य के साथ रहना 
                 धीमा ज़हर है।  
ये सशरीर होकर भी चलती फिरती लाशें हैं, यूँ समझिये 
                खामोश कहर हैं।।   

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