लफ्ज़ (Words)

सच्ची चाहत किसी भी रिश्ते में हो 
कितना प्यार है कहाँ बता पाते हैं 
दिल खोलके कहाँ रख पाते हैं 
लफ्ज़ कम पड़ ही जाते है 
बदन का दर्द बता सकते हैं 
दिल का दर्द कहाँ बता पाते हैं 
खामोश लब थरथराते हैं 
लफ्ज़ कम पड़ ही जाते हैं 
बहुत दिनों बाद कुछ मनचाहा 
अचानक  मिल जाए तो 
पैर थिरके व् होंठ मुस्कुराएं  
लफ्ज़ कम पड़ ही जाते है 
कभी जब आप महसूस करे ज्यादा
प्यार दर्द ख़ुशी शोक कुछ भी   
हमेशा जताने के लिए 
लफ्ज़ कम पड़ ही जाते है 

Even if your love is true
It is difficult to express how you feel
How hard it is to open up your heart
Words always fail you in the end
You can point to where you feel physical pain
But it’s another matter when it is an ache in your heart
Silent lips tremble
Words always fail you in the end
After a long time
If you suddenly find your beloved
Your feet frolic, and you can’t hide your smile
But words still fail you in the end
Whenever you are overwhelmed by
Love, pain, happiness or despair
Words always fail you in the end


4 thoughts on “लफ्ज़ (Words)

    1. हार्दिक धन्यवाद !मुझे ख़ुशी है !आपको मेरा लेखन पसंद आया। मुझे भी आपकी सभी कवितायें बहुत अच्छी लगती हैं।आप का अमूल्य समय देने के लिए शुक्रिया !

      1. बहुत बहुत शुक्रिया आपका
        ऐसे ही खूबसूरती के साथ लिखते रहिए 🤗

      2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका
        ऐसे ही खूबसूरती के साथ लिखते रहिए 🤗

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