सर्वगुणसम्पन्न

तुम्हे चारों तरफ घेरे हुए गुलाब की खुशबु सी 
तुम पर प्यार से मंडळाती तितली सी 
तुम आँखें मूंदो तो मीठे ख्वाब सी 
तुम्हारे हर सवाल का जवाब सी 
तुम्हारे लिए खुली किताब पर पहेली सी 
तुम्हारी सबसे प्यारी सहेली सी
तेरे घर में चिड़िया की चहचहाट सी 
तेरे जीवन में खुशियों की आहट सी 
तेरी एकमात्र प्यार की चाहत सी 
थोड़ी अलमस्त थोड़ी अलबेली सी   
बिन कहे आखों से बोलती सी 
हर रोज़ कुछ नयी सी 
छाऊँ तेरे वज़ूद पर ज्यूँ  
गगन पर सूर्य की रौशनी सी
ऐसा ही चाहते हो ना तुम 
मुझे सर्वगुणसम्पन्न सी 
पर क्या तुम बन पाओगे ऐसे मेरे जीवन में ? 
नहीं ! तो मुझे भी वैसे अपनाओ हूँ जैसी भी !

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