सरकार

वो हमारे प्यार को अधिकार समझे बैठे हैं !
हमारी परवाह  को क्यों फ़र्ज़ समझे बैठे हैं !
वफ़ा की आदत लगे उन्हें,अपनी योग्यता का भ्रम ! 
क्यों वो सर पे  तालिबानी सरकार बने बैठे हैं ?

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