मिल या मत मिल

रूह में ज़ज़्ब हो जाने का ज़ज़्बा हो तो मिल 
मेरी राह में फना हो जाने का दिल हो तो मिल 
मेरे हर डर को हरा सकता हो तो मिल 
मेरा हर ज़ख्म मिटा सकता हो तो मिल
झूठे दिलासे देने हो तो मत मिल 
वक़्त पे कदम पीछे हटाने हो तो मत मिल 
मेरे दर्द पे पीठ पीछे हंसना हो तो मत मिल 
और नया ज़ख्म देना हो तो बिलकुल मत मिल
मिल या मत मिल,मेरे लिए दुआ कर बिस्मिल !

7 thoughts on “मिल या मत मिल

  1. Wow beautiful lines, if you can remove my fear , my sorrow, then you are welcome if you want to give me more pain then don’t come. Well written 😊👌🌹 thank you so much 💕💕


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