ह्रदयदर्पण

सर्वस्व कर दो अर्पण 
कितने भी कर लो तर्पण 
जितनी भी पूजा अर्चन,हैं सब व्यर्थ !
यदि देखा नहीं हमने मन ह्रदयदर्पण !

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