नवजीवन

चेहरे  को  छूती  ये  ठंडी  हवा  
छायी मस्त  ये  काली  घटा  
दिल  पूछता  है  मुझसे  ये 
मुझे  कहाँ  ले  आयी ? तू ये बता!
  
अंधे  कुँए  से  बाहर  कौन  
तुझे  ले  के  आया   ये  बता 
गुनगुनायी  दिल  ने  फिर  कोई  सरगम नयी !
मुस्कुराने  लगी  है  आँखें 
राज़  क्या  है  ये  बता 
 
हवाओं   की  सरगोशियां 
लहलहाना  पेड़ों   का 
रिमझिम  बूंदें  चेहरे  पर 
लायी  'नवजीवन' का  पता  

4 thoughts on “नवजीवन

Leave a Reply