इजाज़त

सह सकते  थे हम तेरे जुल्मों सितम आखिरी दम तक 
पर क्या करें  ज़मीर हाल हालात इज़ाज़त नहीं देते !
मज़बूरियाँ हो गयीं ख़त्म और हम आज़ादी पसंद 
तुम तो अरसे से हमारी आवाज़ का जवाब नहीं देते !

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