खोना

खूब इतरा रहे हो तुम कि तुझमे खोकर 
हम खुद को ढूंढ़ते रहे ! तेरी आवाज़ों में खोये रहे !
पर कभी जानने की कोशश तो की होती 
कितने खुश थे हम खुद को ढूंढ़ते हुए ?
कौन खुश रह सकता है खुद को खोते हुए ?

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