बेकदर

क्या करे कोई जब 
सब कुछ हुआ बेअसर                         
है वो बेवक़ूफ़ जो 
पत्थर पे मारेगा सर !
जब उसको परवाह नहीं 
तुझे क्यों उसकी फ़िक्र !
प्यार में ज़बरदस्ती नहीं 
गर हो गया वो बेकदर !
दर्द की दवा तुझे 
गैर न देगा कोई 
अपना भी है गैर गर 
ज़ज़्बात गए हों उसके मर !
जीवन की कमान तू 
अपने हाथों में ही रख 
जीना है अगर तुझे 
ऊँचा उठा के अपना सर !
भरोसा उठ गया तेरा  
चाहे सारे जहाँ से 
पा जीवन के सही मायने   
रख भरोसा सिर्फ खुद पर !

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