मगरूर

की थी मोहब्बत सोच कर जीवन खिलेगा फूल सा 
पर मोहब्बत ने छीना होश !चुभा काँटा बबूल सा 
जिंदगी ने ढाये सितम  !किये अपनों ने ,गैरों ने ! 
सितमगर ने छीना होश ! पड़ा दिल पे चाँटा मगरूर का !

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