महानता

 पुरानी महानता की बात करना, बात है अच्छी 
 मगर आज के हालात का भी जायजा लो ना
 इंसानियत का स्तर रोज़ गिर रहा नीचे 
 महंगाई का पैमाना भी कभी नाप लो ना 
आत्म मुग्ध आप इतने हो गए हो क्यों 
अपने गिरेबान में भी कभी झाँक लो ना 
 

4 thoughts on “महानता

  1. हथेली में बारिश की एक बूंद गीत या पानी को पॉकेट फ्लावर बना सकती है।
    जब तारीफ पैसे की मुद्रास्फीति की तरह होती है, तो मुझे कुछ भी महान संदेह होता है, और बिना उत्साह के विनम्र अदृश्य होते हैं।

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