क्यों है

शिक्षा,नारी,जाति,धर्म पर
भ्रष्टाचार,अत्याचार, दलित,वर्ण पर 
अपराध,गरीबी,लाचारी और बेरोज़गारी पर
सिर्फ बातें ही बातें क्यों हैं 
 
मीठे झूठ, सतही बातचीत और 
बहकावे के पुरज़ोर इरादे क्यों है
स्वउत्थान ज़रूरी और जनता को
गिराने के इरादे क्यों हैं 

हमारे देश की राजनीति 
समाजसेवा से अलग क्यों है 
यहाँ झूठ का प्रचार और बोलबाला क्यों है
हर इंसान अब इतना तनहा क्यों है 

बस अपना ही सोचता,इंसान फिर भी दुखी क्यों है 
सभी जानते हैं यहाँ ठीक नहीं ये सब !
प्रबुद्ध गुणी जनों बूझो तो ! 
कि आखिर ये होता क्यों है 

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