15.दोहा

जो नियम में है बँधा, वो कैसे हो मुक्त 
आज़ादी के बिन सभी , रहें दर्द से युक्त 

3 thoughts on “15.दोहा

  1. सोना, सज्जन, साधु जन, टूट जुड़ै सौ बार ।
    दुर्जन कुम्भ कुम्हार के, ऐके धका दरार ॥

    अर्थ :
    सोने को अगर सौ बार भी तोड़ा जाए, तो भी उसे फिर जोड़ा जा सकता है। इसी तरह भले मनुष्य हर अवस्था में भले ही रहते हैं। इसके विपरीत बुरे या दुष्ट लोग कुम्हार के घड़े की तरह होते हैं जो एक बार टूटने पर दुबारा कभी नहीं जुड़ता।

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