ग़ुरूर

सब कुछ खोकर भी खुद पर भरोसा बाकी है
क्या लुटा ? अगर मेरी उम्मीद बाकी है
हाँ सच है ! मेरी बेपनाह मोहब्बत है तू 
मगर अभी मुझमे खुद पे ग़ुरूर बाकी है 

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