सौतन

सौतन बैरन ले गयी, पी को अपने साथ 
दिल पर लौटें साँप ज्यूँ , छूटा उसका हाथ 
छूटा उसका हाथ, कसम जन्मों की खाई  
नैनं  बरसे नीर ,सही न जाए जुदाई 
पगली उसको भूल ,रोने से क्या प्रयोजन   
ख़ुशी है मूल्यवान,भाड़ में जाए सौतन 

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