अनुकूल प्रतिकूल

अनुकूलता आपको निखारती नहीं है 
प्रतिकूलता का आपको धन्यवादी होना चाहिए 
बिन हथौड़े छैनी की चोट कैसे पत्थर तराशे कोई 
मूरत को हथौड़े छैनी का धन्यवादी होना चाहिए 

संघर्षों के कांटे बिछे हों चाहे जितने राह में 
फूल हार मान उन्हें अपना लेना चाहिए 
तेरे मेरे विचार और स्वभाव हो सकते हैं अलग 
समझ के एकदूसरे को साथ चलना चाहिए 

आप रखते हो सभी के दिल का ख्याल 
अपने दिल का भी सदा ख्याल रखना चाहिए 
अपेक्षाएं बन जाती हैं जीवन का ज़हर 
धीरे धीरे कोशिशें कर त्याग देना चाहिए 

चाहत दुनियाँ बदलने की ! खुद बदल पाते नहीं 
अपने आप में  सुधार का प्रयास होना चाहिए 
हम सभी को अनुकूलता प्रतिकूलता सोचे बिना 
भरपूर जीवन जीने का मज़ा लेना चाहिए 

2 thoughts on “अनुकूल प्रतिकूल

Leave a Reply