शिव गौरा प्रथम मिलन

 विधा-गीत (दोहा छंद)   
सहस्त्रों वर्ष की कठोर तपस्या के बाद शिव का पार्वती
के सम्मुख प्राकट्य और शिव गौरा प्रथम मिलन संवाद मेरे शब्दों में  :-

गौरा :-
🌹🌹प्रणय निवेदन कर रहीं, शिव से गौरा आज 
सहस्त्र युग बीते मगर, कहाँ रहे सरताज ।।🌹🌹

 अपनी हालत बताते हुए कहती हैं :-
🌹🌹विरहा में कैसे कटे, प्रभु मेरे दिन-रात। 
दिल मेरा रोया बहुत, अँखियन से बरसात।।🌹🌹

अपना संघर्ष साझा कर रहीं हैं :-
🌹🌹तुमको पाने को करूँ , कठिन तपस्या रोज़। 
क्यों रूठे तुम इसतरह, हुई न मेरी खोज।। 🌹🌹
 
भोलेनाथ द्रवित मन से कहते हैं :-
शिव जी :-
🌹🌹विधि का लिखा मिटे नहीं, सुनो प्रेयसी राज । 
कितना मैं विचलित रहा, आओ कह दूँ आज।।🌹🌹

कारण भी कहा कि :-   
🌹🌹अपनी सुध न रही मुझे , नहीं याद दिन रात। 
ऐसी समाधि लग गयी ,ह्रदय लगा आघात ।। 🌹🌹

शिव को दुखी देख पार्वती जी नम्रता से बोलीं :- 
गौरा :-
🌹🌹छोड़ो बीती बात तुम, प्रिय संवारें आज। 
प्रेम करो स्वीकार तुम, अब तो रख लो लाज।।🌹🌹

शिव की सांत्वना सुनिए :-
शिव जी :-
🌹🌹आऊँगा मैं आद्या,  तुम हो मेरा मान। 
मायके से विदा मिले , तुमको सह-सम्मान।।🌹🌹

ज्यादा समय लगने के डर से गौरा बोलीं :-
गौरा :-
🌹🌹बीते सहस्त्र बरस प्रभु, कल्प गए जी बीत। 
बहुत रह चुकी दूर अब, तुमसे ओ मनमीत ।। 🌹🌹

शिव समझाते हुए बोले :-
शिव जी :-
🌹🌹अति प्रतीक्षा की प्रिये, और एक बस मोड़। 
फिर न कभी होंगे अलग, दृढ़ होगा गठजोड़।।🌹🌹

🌹🌹शिव ने शक्ति की महत्ता भी बतायी :-    
लूँगा बाँयें अंग प्रिय, तुम हो मेरा प्राण। 
शिव-शक्ति के मिलाप से, जग का हो कल्याण ।।🌹🌹
              ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️
       

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