पंछी और इंसान

   माना आसान नहीं,पर बच्चों को खिलने का पूरा मौका दीजिये। 
अपनी पसंद से शादी, अपनी पसंद से कैरियर, अपने मनमुताबिक 
चलाना, इज़्ज़त के नाम पर !   
          अपने स्वार्थ में उनके सपनों की आहुति मत दीजिये...
पंख निकलते ही बच्चों के 
सदा पंछी देते उड़ा 
मांगें नहीं वापस वो उनसे  
जो भी उनके लिए किया
उनका जीवन उनको सौंप   
वो रहते हो निश्चिंत 
जब-तब बच्चे लौटें आएँ  
फिर से उनके ही पास 
हों बूढ़े तो वो दाना भी ख़िलाएँ 
बिठा कर अपने पास 
हम इंसान क्यों बच्चों को 
न देते उनका आसमां 
पंख कतरने के सदैव ही 
क्यों रखते अरमान 
निरपेक्ष भाव परवरिश 
से रंग नए खिल जाते 
उम्र बढ़ने पर बच्चे भी 
माँ-बाप का साथ निभाते 
क्यों भूलते प्रकृति नियम 
न साथ सदा रह पाते 
न साथ सदा रह पाते 

2 thoughts on “पंछी और इंसान

  1. Wonderful. I will say people should not have children if they want old-age attendants and caretakers. They should be willing to let them free. And create a good example for them. They will learn more from your example than in classrooms.

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